‘पहाड़ धूमण’ गीत देगा घर वापसी और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश

देहरादून

आशा कोठारी

देहरादून। उत्तराखंड से लगातार हो रहे पलायन की पीड़ा और अपनी मातृभूमि से जुड़े रहने का भावनात्मक संदेश लेकर जौनसारी लोकगीत ‘पहाड़ धूमण’ श्रोताओं के बीच आ गया है। प्रसिद्ध लोक गायिका रेश्मा शाह और बॉलीवुड गायिका का यह गीत 28 जुलाई को मुंबई के दादर में रिलीज किया गया।
प्रसिद्ध लोक गायिका रेशमा शाह ने बताया कि इस एल्बम का विमोचन सुप्रसिद्ध भजन गायक श्री अनूप जलोटा द्वारा किया गयाl
उन्होंने बताया कि श्री जलोटा को उत्तराखंड की टोपी भी पहनाई गई, वह ब्रह्म कमल भी भेंट किया गया l
गीत का मूल उद्देश्य रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में पहाड़ छोड़ चुके लोगों को अपनी जड़ों, संस्कृति और जन्मभूमि से जुड़े रहने का संदेश देना है। गीत के बोल उत्तराखंड के पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता, लोक परंपराओं और पारिवारिक भावनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो हर श्रोता को भावुक कर देते हैं।
गीत को संगीत राजेश गंधर्व और नवीन नेगी ने दिया है। निर्माताओं के अनुसार, यह गीत जल्द ही विभिन्न म्यूजिक प्लेटफॉर्म और यूट्यूब पर भी उपलब्ध होगा, ताकि देश-विदेश में बसे उत्तराखंडवासी भी इसे सुन सकें।
रेश्मा शाह का कहना है कि ‘पहाड़ धूमण’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, अपनी बोली और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का संदेश है। उनका विश्वास है कि यह गीत नई पीढ़ी को अपनी लोकसंस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ पलायन जैसे गंभीर विषय पर सकारात्मक सोच विकसित करेगा। इस गीत में गायिका का अन्नपूर्णा ने भी शुभ मधुर जुगलबंदी की है,
लोकसंगीत प्रेमियों का मानना है कि अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति और सामाजिक संदेश के कारण ‘पहाड़ धूमण’ उत्तराखंड के लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाएगा तथा अपनी मातृभूमि के प्रति अपनत्व और गौरव की भावना को और मजबूत करेगा।