डोईवाला/देहरादून
आशा कोठारी



बुधवार को मुख्यमंत्री के कोऑर्डिनेटर हरीश कोठारी ने मंदिर समिति के अध्यक्ष देवराज सावन सहित समिति के सभी पदाधिकारियों तथा महिला कीर्तन मंडली की सभी पदाधिकारियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर हरीश कोठारी ने मंदिर समिति द्वारा धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को जोड़ने के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि मंदिर समिति न केवल धार्मिक आयोजनों का सफल संचालन कर रही है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और संस्कारों को भी बढ़ावा दे रही है। महिला कीर्तन मंडली की सक्रिय भागीदारी से धार्मिक वातावरण सुदृढ़ हो रहा है तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रेरणादायक कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने समाजहित में इसी प्रकार समर्पित भाव से कार्य करते रहने का संकल्प व्यक्त किया।
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वर्षों पुराना श्री लच्छेश्वर शिव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र, सावन में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
देहरादून। वर्षों पुराना श्री लच्छेश्वर शिव मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। अंग्रेजों के समय से जुड़े इस प्राचीन मंदिर का इतिहास अत्यंत रोचक और श्रद्धा से परिपूर्ण है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, जहां आज मंदिर स्थित है, वहां पहले वनकर्मी का आवास था। उसकी गाय प्रतिदिन एक स्थान पर जाकर अपने थनों से स्वयं दूध प्रवाहित करती थी। जब वनकर्मी ने उस स्थान की जांच की तो वहां भूमि में स्थापित एक प्राचीन शिवलिंग मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने श्रद्धा के साथ उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया, जो आज श्री लच्छेश्वर शिव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन बना रहता है, लेकिन सावन मास का विशेष महत्व है। सावन के प्रत्येक सोमवार के साथ-साथ अन्य दिनों में भी बड़ी संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फलित होती है और भगवान लच्छेश्वर महादेव सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष दो दिवसीय विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दराज़ और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भजन-कीर्तन, भंडारे एवं सामाजिक सहभागिता का अनूठा वातावरण देखने को मिलता है।
मंदिर परिसर में समय-समय पर श्रीमद्भागवत कथा, हवन, धार्मिक अनुष्ठान, विवाह संस्कार तथा भंडारों का आयोजन भी होता रहता है। मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन मंदिर समिति द्वारा किया जाता है, जो श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से अगरबत्ती और दीपक बाहर निर्धारित स्थान पर ही जलाने का अनुरोध भी किया जाता है, ताकि मंदिर की पवित्रता एवं सुरक्षा बनी रहे।
आज श्री लच्छेश्वर शिव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक आस्था का जीवंत प्रतीक बन चुका है।