शिक्षक दिवस पर विशेष
देहरादून प्रभा भट्ट

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: !
गुरु: साक्षात् परब्रह्म: तस्मै श्रीगुरवे नमः!!
शिक्षक दिवस, जहां ‘शिक्षा में राष्ट्र निर्माण की शक्ति और शिक्षकों में क्षमता’ के प्रबल समर्थक कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ ही बेहतरीन शिक्षक, विद्वान और प्रसिद्ध दार्शनिक भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को शिक्षकों के सम्मान में मनाया जा रहा है। वहीं आज एक ऐसे शिक्षक, जो निरन्तर छात्रों को अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरित करते रहे हैं। एक चरित्रवान, सेवा भावना एवम् त्याग के प्रतीक और समर्पित भाव से अपने कर्त्तव्यों के प्रति निष्ठावान राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित आदर्श शिक्षक श्रीमान कमलेश्वर प्रसाद भट्ट जी को सेवानिवृति के फलस्वरूप शिक्षक दिवस पर बधाई देते हुए स्वस्थ जीवन और मंगलमय भविष्य की शुभकामनाएं देते हैं।
आदरणीय कमलेश्वर प्रसाद भट्ट जी का जन्म अगस्त 03, 1963 को तत्कालीन उत्तरप्रदेश वर्तमान उत्तराखंड, जनपद टिहरी गढ़वाल, कीर्तिनगर विकासखंड स्थित दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र रिंगोलगांव थाती डागर में मां श्रीमती रामकली देवी और पिता पण्डित रामेश्वर प्रसाद भट्ट जी के घर दो भाई व दो बहिनों के बाद हुआ।
बातचीत में भट्ट बताते हैं कि उनके पिता पण्डित रामेश्वर प्रसाद भट्ट कृषक परिवार से, लेकिन बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के प्रति अति संवेदनशील रहे। पिता ने संयुक्त परिवार की जिम्मेदारी को समझते हुए शुरुआत में गांव के बच्चों को पढ़ाकर, परचून की दुकान के अलावा मसूरी में होटल व्यवसाय से घर परिवार का भरण-पोषण किया और आज हमें इस लायक बनाया।
पिता की मेहनत की जिम्मेदारी दोनों बड़े भाई-भाभी व बहिनों ने संभाली और इसी की बदौलत आज हम स्वयं के साथ-साथ सामाजिक दायित्व निर्वहन में भी कुछ योगदान दे पा रहे हैं।
श्री कमलेश्वर प्रसाद भट्ट जी की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पंडित परमानंद जी की देखरेख में हुई, मसूरी के आर एन भार्गव इण्टर कॉलेज से हाईस्कूल और आगे की पढ़ाई टिहरी गढ़वाल से पूरी हुई। विज्ञान स्नातक के बाद बी-एड, अर्थशास्त्र एवम् विधि की उपाधि में दक्षता हासिल करने के पश्चात् वर्ष 1984 से ही टिहरी की राजमाता श्रीमती कमलेंदुमती शाह द्वारा स्थापित नरेन्द्र महिला विद्यालय में गणित शिक्षण के रूप में शिक्षण कार्य की बुनियाद पड़ी। खेल के प्रति विशेष रूचि, टेबिल टेनिस खिलाड़ी और एन सी सी ‘सी सर्टिफिकेट’ की बदौलत आई टी वी पी करेरा (मध्यप्रदेश) के लिए चयन होना किंतु माता-पिता की अनिच्छा, घर वापसी के उपरान्त दिसम्बर 1988 से गणित-विज्ञान शिक्षण हेतु राजकीय सेवा में चयन हुआ। इस दौरान टिहरी जनपद के विभिन्न इन्टर कॉलेज डांगचौरा, प्रताप इण्टर कॉलेज नई टिहरी, नागणी के अलावा आवासीय विद्यालय राजीव गांधी नवोदय विद्यालय देहरादून में भी सेवा का अवसर मिला। आवासीय विद्यालय की व्यवस्था के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों से सीधे रूबरू भी हुए, लेकिन बच्चों के वात्सल्य ने आँच न आने दी, अविस्मरणीय है।
छात्रों की शिक्षा का स्तर हो या फिर पाठ्यसहगामी क्रियाकलापों में भागीदारी, हर क्षेत्र में सफलता मिलती रही। विज्ञान प्रदर्शनी में छात्रों को गोल्ड मेडल, स्काउटिंग-गाइडिंग की दो दो जंबूरी में स्वयंसेवी छात्रों का प्रतिभाग, नैनीताल राजभवन में बच्चों को राज्यपाल अवॉर्ड, जूनियर रेडक्रास सोसाइटी सेवा कार्य , पुस्तक लेखन के रूप में एस सी ई आर टी उत्तराखंड से लेकर एन सी ई आर टी अजमेर राजस्थान और नई दिल्ली में योगदान, इग्नू प्रशिक्षण समीक्षा, विद्यालय ईको क्लब मौसम विज्ञान कार्यशाला स्थापित करने हेतु आई आई टी नई दिल्ली से प्रशिक्षण, आई आई टी रुड़की का सहयोग, पण्डित गोविन्द बल्लभ पंत विश्व विद्यालय अल्मोड़ा में प्रस्तुतीकरण का अवसर के साथ सृजनिका, पर्वतजन, युगवाणी जैसी पत्रिकाओं में स्थान मिलना या फिर राष्ट्रीय महत्व के शासकीय कार्यों राष्ट्रीय साक्षरता मिशन द्वारा सम्पूर्ण साक्षरता अभियान में वातावरण सृजन हेतु कला जत्था के रूप में आई ए एस अकादमी मसूरी में विशिष्ट प्रदर्शन का अवसर, जनपद उत्तरकाशी में भूकम्प के दौरान राहत सेवा कार्य के फलस्वरूप पर्यावरण संरक्षण एवम् प्रदूषण नियंत्रण हेतु माननीय मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत, डॉ ए पी जे कलाम द्वारा थर्ड कंप्यूटर लिटरेसी एक्सीलेंसी अवॉर्ड, इंटेल एवम् उत्तराखंड सरकार द्वारा माननीय मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी जी के हाथों टेक्नोलॉजी इन एजुकेशन अवार्ड, दलित समाज के उत्थान हेतु कार्य करने पर डॉ आंबेडकर फैलोशिप अवॉर्ड, एयर इंडिया एवं दैनिक जागरण द्वारा ब्रॉड आउटलुक लर्नर टीचर अवार्ड के साथ राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करना गौरव की बात है।
अन्तिम दशक देहरादून के रायपुर ब्लॉक स्थित इण्टर कॉलेज बुरांसखंडा में ग्रामीण परिवेश के बच्चों के साथ यादगार बना, निजी और राजकीय विद्यालय में लगभग 42 वर्ष का स्वर्णिम सफर यादगार बना। वर्ष 2008 से 2016 तक बाल कल्याण परिषद द्वारा असहाय बच्चों के हितार्थ बनाए गए वालभवन में निःशुल्क गणित शिक्षण दिया, कार्यस्थल दूर होने के कारण शिक्षण कार्य स्थगित करना पड़ा। वर्ष 2011 से अद्यतन उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद में अवैतनिक संयुक्त सचिव के रूप में अभावग्रस्त एवं जरुरतमंद बच्चों के हितार्थ यथाशक्ति समय देकर इस महान यज्ञ में आहूति देकर सुकून पा रहा हूं।
सेवाकाल का स्वर्णिम सफर साझा करते हुए भट्ट बताते हैं कि भले ही मुझे हमेशा आगे आने के अवसर मिलते रहे हों, किन्तु सफलता का श्रेय अपने साथियों के सहयोग और घर-परिवार को मानते हैं। भट्ट बताते हैं कि मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने में मेरे पूज्य माता-पिता का आशीर्वाद तो सदैव है ही, साथ में बड़े भाई-भाभी शंभू प्रसाद-कृष्णा भट्ट, गुरु प्रसाद ऊषा भट्ट, और दीदी-जीजा जी विशेश्वरी-राजेन्द्र प्रसाद जोशी, गुड्डी देवी-मंत्री प्रसाद अन्थवाल के साथ ही अपने सास-ससुर जगदम्बा-कमलेश्वर प्रसाद उनियाल जिनके संस्कार का प्रसाद मुझे अर्धांगिनी पुष्पा के रूप में हर पल मिलता आ रहा है। इतना ही नहीं हमारी भावी पीढ़ी का स्नेह, कुटुम्ब-ग्रामवासियों और रिश्तेदारों सहित समस्त स्वजनों का सानिध्य बराबर प्राप्त है, यह अपना सौभाग्य समझता हूं।
सेवानिवृति के अवसर पर अपने सभी सम्मानित अधिकारियों, सहयोगी अध्यापक कर्मचारियों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, सगा-संबंधियों एवम् छात्र-छात्राओं के स्नेहभाव का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी तरह सानिध्य की अपेक्षा करता हूं। एक बार पुनः बुरांस परिवार के सम्मानित साथियों और बच्चों का आभार!