१८ वर्ष पूर्व ४ नवम्बर २००८ को भारत सरकार ने जाह्नवी गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया था, सुमगल-ध्वनि । -प्रेम बड़ाकोटी

प्रेम बड़ाकोटी
जॉली ग्रांट /देहरादून

हिमगिरि के धवल शिखर,गोमुख के ताल से,
बह चली तरंगिनी,शंकर के भाल से,
भगीरथ की तपस्या, पुरखों को तारने,
भारत की शस्य श्यामला, धरती सँवारने ।

गंगा तू देव दुर्लभा,भारत का हार है,
गंगा तू पूजनीय कोटि, नमस्कार हैं ।
तुझसे ही अपने देश की,पहिचान है गंगा,
तू आन,बान,शान, और मान है गंगा ।

असंख्य नीर वाहिनी,मिलती जो तेरी धार में,
सबको पवित्र कर रही, माँ सा दुलार दे।
युग-युग से बहती आ रही,तुझको विराम क्या,
अवरोध,बाधा-विघ्न से,तुझको है काम क्या।

सौभाग्य इस धरा का, अविराम बह रही,
सन्देश परोपकार का, जन-जन को दे रही।
सिरमोर थे हम विश्व में,झुकता जहान था,
भारत सदा विशाल था, भारत महान था ।

कुंभ -अनुष्ठान की, तुम्हीं तो मेजबान हो,
पयस्विनी, जाह्नवी, अमृत समान हो।
तेरा प्रवाह रोकता, वो कौन गुनहगार है ?
माँ से ये कैसी तिजारत,कैसा ये व्यवहार है?

तेरा विराट अवतरण,हर घाट तीर्थ हो गया,
समुद्र भी तुझको पाकर,गंगासगर हो गया।
जब तक रहेगी सृष्टि,तेरा नाम रहेगा,
तेरी अखण्ड कीर्ति का,यशगान रहेगा।

लगता है जैसे जाह्नवी,गंगा उदास है ,
इसके बचाव के लिये, निरन्तर प्रयास हैं ।
बस चाह है कि तुम, नित्य ही बहती रहो,
अविरल बहो,निर्मल रहो,पावन बनी रहो।