उत्तराखण्ड : राहत और बचाव का बना मजबूत सिस्टम

देहरादून

आशा कोठारी

मुख्यमंत्री धामी के कुशल आपदा प्रबंधन में बचाई गई हजारों जिंदगियां

देवदूत बने एसडीआरएफ के जवान, दूसरे राज्यों में भी कर रहे मदद

देहरादून। उत्तराखण्ड में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और राहत व बचाव कार्यों का मजबूत और प्रभावी सिस्टम तैयार कर लिया गया है। उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्र में फंसे ट्रेकर्स के सफल बचाव अभियान में भी यह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। बीते दो वर्षों की ही बात करें तो प्राकृतिक आपदाओं में हजारों जिंदगियों को बचाया गया है। बचाव अभियानों में एसडीआरएफ की अहम भूमिका रही है। और यही वजह है कि आज दूसरे राज्य भी उत्तराखण्ड एसडीआरएफ की मदद ले रहे हैं।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों से घिरे उत्तराखण्ड में प्राकृतिक आपदाओं से निपटना बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इस चुनौती से पार पाने के लिए प्रभावी और मजबूत सिस्टम तैयार करने में सफल रही है। आपदाओं के जोखिम की पहचान, न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। आपदाओं में जान माल का नुकसान कम से कम हो, इसके लिए जिओ स्पेशल तकनीक, रिमोट सेंसिंग,अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया गया है। ग्राउंड जीरो पर सक्रिय निगरानी, त्वरित निर्णय और आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।

बचाव और राहत कार्यों में एसडीआरएफ अग्रणी भूमिका निभा रही है। बारिश, बाढ़, भूस्खलन, नदी नालों में उफान जैसी आपदाओं में बल के जवान अपनी जान पर खेलकर लोगों के लिए देवदूत साबित हो रहे हैं। आज दूसरे प्रदेश भी उत्तराखण्ड एसडीआरएफ की मदद ले रहे हैं। आंध्र प्रदेश में एक नाव दुर्घटना होने पर बचाव व राहत कार्यों के लिए एसडीआरएफ को बुलाया गया। इसी प्रकार इलाहाबाद कुंभ में तैनाती के दौरान बल के जवानों ने कई श्रद्धालुओं को डूबने से बचाया था।

उत्तराखण्ड में वर्ष 23 से 26 तक बड़े रेस्क्यू अभियान

-13 अगस्त 2026 को चमोली जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में पानी का रिसाव और भूस्खलन होने से 22 श्रमिक वहीं फंस गए थे। तब 117 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 12 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।

-उत्तरकाशी जिले में पांच अगस्त 2025 को खीर गंगा की बाढ़ ने थराली और हर्षिल में भारी तबाही मचाई थी। तब आपदा में फंसे 1200 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

-वर्ष 2024 में 31 जुलाई की रात को केदारनाथ के लिंचोली क्षेत्र में बादल फटने से पूरी केदारघाटी में भारी तबाही मची थी। तब 15 हजार से अधिक यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया था।

-12 नवंबर 2023 को उत्तरकाशी जिले के सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन होने से 41 श्रमिक सुरंग में ही फंस गए थे। तब इन मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए 17 दिनों तक बचाव अभियान चलाया गया।

“उत्तराखण्ड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला राज्य है, जहां आपदाओं का जोखिम बना रहता है। हमारी सरकार ने राहत और बचाव तंत्र को मजबूत किया है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और त्वरित कार्रवाई से हजारों लोगों की जान बचाई गई है। एसडीआरएफ के जवानों ने साहस और समर्पण से देशभर में उत्तराखण्ड का मान बढ़ाया है।”