स्वतन्त्रता की ७९ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर,स्वाधीनता आन्दोलन के क्रान्तिकारी, युगदृष्टा महर्षि अरविन्द घोष के जन्मदिवस के पावन प्रसंग पर,उनके राष्ट्रीय योगदान का चिरस्मरण !

जॉली ग्रांट/ देहरादून –
प्रेम बड़ाकोटी

आज के दिन, १५ अगस्त, १८७२ को जन्मे महर्षि श्री अरविन्द, ICS परीक्षा उत्तीर्ण की किन्तु नौकरी नहीं की । अध्ययन में रुचि, बहुभाषाविद,सन्त जैसा जीवन, लोकमान्य तिलक के सहयोगी, समकक्ष अरविन्द, स्वाधीनता आन्दोलन के क्रान्तिकर्ता बने। बंगाल में ‘युगान्तर’ व ‘वन्देमातरम्’ के सम्पादन से उन्होंने ब्रिटिश राज्य पर आघात किये,विरोध किया । कान्तिकारियों की प्रसिद्ध संस्था, अनुशीलन समिति के वे सक्रिय कार्यकर्ता बने । स्मरणीय है कि संघ संस्थापक डॉ० केशव राव हेडगेवार ने भी इस समिति के सदस्य के रूप में स्वाधीनता आन्दोलन में भाग लिया,जेल की सजा काटी। ऐतिहासिक अलीपुर बमकाण्ड में महर्षि अरविन्द ने एक वर्ष तक कारागार की दुरुह यातनाएं सहीं। वे देशद्रोही लेखक घोषित किये गये। जीवनभर वे एक सन्त, विचारक के जैसे थे, किन्तु अन्तिम समय वे सन्यासी हो गए, इस घोषणा के साथ कि हिन्दुराष्ट्र सनातन की ही एक मूर्त संकल्पना है, उसके लिए कार्य करना है । अपनी सहयोगी श्रीमाँ के कृतित्व से पाण्डिचेरी में स्थापित प्रसिद्ध अरविन्द आश्रम उनके ही विचारों व कार्यों का निकेत है। ५ दिसम्बर १९६० को वे ब्रह्मलीन हो गये। स्वतन्त्रता की ७९ वीं वर्षगांठ पर तथा उनके पावन जन्मदिन पर,उनके राष्ट्रीय योगदान का चिरस्मरण !

-प्रेम बड़ाकोटी
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