देहरादून /जॉली ग्रांट – आशा कोठारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं समाजसेवी प्रेम बडाकोटी का जीवन राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन का प्रेरणादायी उदाहरण रहा है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित, समाज जागरण और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित किया है। वर्षों से संघ की विचारधारा के अनुरूप समाज में संगठनात्मक कार्यों को मजबूती प्रदान करते हुए उन्होंने सेवा, समर्पण और अनुशासन का आदर्श प्रस्तुत किया है।
प्रेम बडाकोटी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। संगठन के विस्तार, युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है। उनका मानना रहा है कि सशक्त राष्ट्र का निर्माण संस्कारित समाज और जागरूक नागरिकों से ही संभव है।
देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए उन्होंने संघर्ष का मार्ग चुना। लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता का परिचय दिया। उनका यह संघर्ष आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।
सामाजिक जीवन में भी प्रेम बडाकोटी सदैव अग्रणी रहे हैं। शिक्षा, सांस्कृतिक गतिविधियों, जनजागरण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर उन्होंने निरंतर कार्य किया। लेखन के क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता उल्लेखनीय रही है। अपने लेखों और विचारों के माध्यम से उन्होंने समाज को सकारात्मक दिशा देने, राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने तथा भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया है।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। राज्य सरकार में विभिन्न अवसरों पर उन्हें दायित्व सौंपे गए, जिनका उन्होंने पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक दक्षता के कारण वे जनहित के मुद्दों पर सदैव मुखर रहे तथा विकासोन्मुख सोच के साथ कार्य करते रहे।
आज भी प्रेम बडाकोटी समाजहित के विभिन्न विषयों पर निरंतर चिंतन और मनन करते हैं। वे सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विषयों पर अपने अनुभवों से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहे हैं। राष्ट्र प्रथम की भावना उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान है। उनका मानना है कि समाज की सेवा ही सच्ची राष्ट्रसेवा है और प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए।
प्रेम बडाकोटी का जीवन त्याग, सेवा, अनुशासन और राष्ट्र समर्पण की ऐसी गाथा है, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किया गया संघर्ष तथा समाज और राष्ट्र के प्रति उनका आजीवन समर्पण उन्हें उत्तराखंड के सम्मानित सामाजिक एवं वैचारिक व्यक्तित्वों में विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।