टिहरी गढ़वाल / देहरादून:
आशा कोठारी




आज सक्षम स्थापना दिवस के पावन अवसर पर जनपद टिहरी गढ़वाल की सक्षम ईकाई ने सक्षम का स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। जिसमें सत्रह लोगों की उपस्थिति रही। सक्षम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग जनों की सहायता है और उसे धरातल में साकार करना हम सबका लक्ष्य है। इस सन्दर्भ में दिव्यांगों की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें ग्राम कैच्छू से पैर से अशक्त श्री हर्ष मणि पन्त जो विगत 18 वर्षों से पैर से असहाय चलने फिरने में असमर्थ हैं, उनका दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बन पाया अतः समस्या के निदान हेतु मुख्यचिकित्सा अधिकारी से वार्ता कर हल ढूंढ़ने का प्रयास किया जाएगा। ऐसी समस्याएं एक दो और हैं उनका निदान भी आवश्यक है। समाज के अन्तिम छोर पर ऐसे सभी सम्मानित दिव्यांगों को सहायता मिल जाए यही हमारा मूल उद्देश्य होना चाहिए। यथा सम्भव प्रयास किया जाएगा। दूसरा बिन्दु था ‘जीते जी रक्तदान और जाते जाते नेत्र दान आज चार लोगों ने नेत्र दान की पेशकश की आशा है एक दो दिन में कुछ और व्यक्ति भी प्रेरित होंगे अतः अचिर भविष्य में नेत्रदान महादान का कार्यक्रम रखा जाएगा, इस पर डाक्टर ब्रजेश जी ने पंजीकरण हेतु मुख्यचिकित्सा अधिकारी महोदय की संस्तुति सहित आने का बचन दिया है। उपस्थित दिव्यांगों को एक सूक्ष्म भेंट देकर उनका धन्यवाद किया। कार्यक्रम के समापन से पूर्व सक्षम टिहरी के पूर्व सचिव डाक्टर सतीश उनियाल जी की सहधर्मिणी जिनका अभी हाल में शरीर शान्त हुआ उन्हें दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। आज सक्षम के नये सचिव श्री हरिकृष्ण भट्ट जी का उद्बोधन सक्षम के कार्यों की जानकारी के साथ नेत्र दान पर केन्द्रित था। इस अवसर पर सदस्य क्षेत्र पंचायत सुशील कुमार बहुगुणा कोषाध्यक्ष श्री नेगी जी, युवा जन जागरण के प्रति समर्पित श्री रविन्द्र बहुगुणा, श्री कृष्णा नन्द बहुगुणा, श्री विनोद बहुगुणा, श्री राकेश भट्ट, श्री विनोद कोठारी, का सम्बोधन तथा लाभार्थी दिव्यांग कु० आरती, श्रीमती चन्द्रकला, श्रीचन्द्र किशोर, श्री कुलवीर, श्री प्रेमदास सहित सोलह जन उपस्थित थे। ईश्वर से यह प्रार्थना की गई कि कोई भी व्यक्ति दिव्यांग न बने, आज के स्थापना दिवस समारोह में सबकी उन्नति के मार्ग को प्रशस्त होने की कामना की गई। शान्ति मंत्र के साथ पुनः मिलन की शुभकामना। सभी उपस्थित जनों का आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया गया। सक्षम भारत, समर्थ भारत।