योग वर्तमान का आविष्कार नहीं सनातन काल से यह हमारी विरासत है

प्रेम बड़ाकोटी

जॉली ग्रांट / देहरादून:

योग:

इक्कीस जून योग-दिवस घोषित है,
विश्व-भर के लिये,
भारत को पहल ,
स्वत्व की पहिचान है,
संकल्प का आह्वान है।

स्मरण रहे,
योग वर्तमान का अविष्कार नहीं,
सनातन काल से,
यह हमारी विरासत है, जो शाश्वत् है।
सहस्राब्दियों के संस्कारों का निकष है।
भारत की धरती पर,
उपजा, पनपा जीवन रस है।
योग हमारी प्रकृति है,
साधकों की कृति है,
देश की संस्कृति है।
इसमें सेवा,योगक्षेम् निहित है ।
योग अर्थात् जुड़ाव, सहअस्तित्व,
लक्ष्य के प्रति, कर्म के प्रति,
अपने इष्ट के प्रति, समाज के प्रति ।

योग की परिधि विस्तृत है,व्यापक है,
योग का अर्थ ?
संयमित जीवन,
शुचितापूर्ण आचरण,
उदात्त विचार, मर्यादित व्यवहार।
इन गुणों से युक्त,
‘ द्वापर के श्रीकृष्ण’ !
गीता के प्रवर्तक बने,
धर्मसंस्थापनार्थ आगे आये,
तभी योगेश्वर कहलाये ।

योग जीवन-कवच है,
योग आरोग्य रक्षक है,
योग दर्शन है,
ग्रन्थो में इसका व्यापक वर्णन है।
पतञ्जलि,आदि शंकर,अरविन्द,
स्वामीराम सदृश,ऋषि मुनि,
कोटिश:युगीन सन्त वृन्द,
अर्थात् !
योग के प्रणेता,प्रेरक,
जिन्होंने योग को जिया,
अक्षुण्ण रखा,इसे विस्तार दिया।

हिमालय के अध्येता,
‘कर्मयोगी डॉ० नित्यानन्द’,
स्वस्थ तन,स्वस्थ मन के आग्रही थे,
युवाओं के मध्य वे कहते थे,-
सम्पत्ति अर्जित करने के लिये,
व्यक्ति अथक परिश्रम करता है,
वही जिजीविषा,
स्वास्थ्य के प्रति भी चाहिए।
शास्त्र कहते हैं,-
‘शरीर माध्यम,खलु धर्मसाधनम्’,
योगः कर्मसु कौशलम् ।

दुनिया जानती है,इस सच को मानती है,
कि, योग !
विश्व को भारत की ही देन है,
पश्चिम के प्रभाव से योग,योगा हो गया,
क्रिया जीवित दीखती है,भाव कहीं खो गया।
योग दर्शन है, प्रदर्शन नहीं,
मानव-मात्र के लिये वरदान है,
युगों के चिन्तन का परिणाम है,
ऋषि परम्परा का अनुसन्धान है,
योग एक विज्ञान है।
प्राणिमात्र के कल्याण के लिए,
सर्वे सन्तु निरामया, हमारी आकाँक्षा है,
मन्तव्य !
शारीरिक व्यायाम, आसन-प्राणायाम,
जीवन के लिए,
अनिवार्य है, अपरिहार्य हैं ॥

योगदिवस के सूत्रधार, प्रेरक,
श्री नरेंद्रभाई !
इस शुभ अवसर पर,
बंगभूमि की क्रान्तिधरा पर,
नये परिवेश में,बंकिम बाबू के प्रदेश में,
शामिल होंगे,योग करेंगे ।
जो साहस का परिचायक है,
चर्चा करने लायक है ।

योगदिवस पर,
केवल बधाई, शुभकामना नहीं,
अपेक्षित है,
स्वस्थ देह के लिये,
स्वस्थ देश के लिये,
योग को,
आग्रहपूर्वक अपनाइये,
दिनचर्या का हिस्सा बनाइये॥