महिला उद्यमिता को मंच दे रहा चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव: सुबोध उनियाल

चम्पावत / देहरादून:

आशा कोठारी

लोकसंगीत की मधुर धुनों पर झूमा सरस कॉर्बेट महोत्सव का मंच

चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026 के छठे दिन की सांस्कृतिक संध्या लोकसंस्कृति, संगीत और महिला सशक्तिकरण के संदेश से ओतप्रोत रही।

सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में माननीय कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मंत्री वन, भाषा, निर्वाचन एवं तकनीकी शिक्षा, उत्तराखंड सरकार तथा सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन की संस्थापक गीता धामी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

लोकगायक सुंदर बाफिला ने फिल्मी गीत “सोचेंगे तुम्हें प्यार” की भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं का हृदय जीत लिया। बचपन से नेत्रहीन होने के बावजूद उन्होंने अपने अद्भुत स्वर, निरंतर साधना और अटूट आत्मविश्वास के बल पर लोकसंगीत के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

गायक भूपेंद्र बसेड़ा ने “प्यारी देवभूमि” गीत के माध्यम से उत्तराखंड की प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया।

प्रियंका महर ने “बेडू पाको” और “स्वामी जी” जैसे लोकप्रिय गीतों से दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया।

वहीं राकेश खनवाल ने “हिमूली”, “मधुली वे”, “हफ्ते में इतवार का दिन” और “बुलेट मा भीना” जैसे सुपरहिट कुमाऊँनी गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे पंडाल को नृत्यमय कर दिया।

कल्याण सिंह ने माइंड रीडिंग मैजिक शो के माध्यम से अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन कर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।

सदानंद विश्वास के नेतृत्व में “कथक धरोहर” समूह ने कथक नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इसके साथ ही असम के पारंपरिक बिहू नृत्य की प्रस्तुति ने भारत की सांस्कृतिक विविधता की जीवंत झलक प्रस्तुत की। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम के दौरान माननीय मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने विभिन्न राज्यों से आए स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों एवं व्यंजनों का स्वाद लिया तथा उनसे संवाद कर उनके अनुभवों की जानकारी प्राप्त की।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव महिलाओं की आर्थिकी को सशक्त बनाने का सशक्त माध्यम है। महिलाओं की शक्ति से ही उत्तराखंड का भविष्य स्वर्णिम बनेगा। ऐसे महोत्सव उद्यमिता को मंच प्रदान कर स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाते हैं।

सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन की संस्थापक श्रीमती गीता धामी ने कहा कि यह आयोजन ग्रामीण आस्था और परंपरा का उत्सव है। हस्तनिर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने, ब्रांडिंग और विपणन के लिए यह महोत्सव प्रभावी मंच सिद्ध हो रहा है। ऐसे आयोजनों से चम्पावत की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ होगी