प्रेम बड़ाकोटी
जॉली ग्रांट /देहरादून

स्वधीनता आन्दोलन के आधार स्तम्भ,
स्वतन्त्र भारत के शुभारम्भ,
सजग प्रहरी,लोहपुरुष,
कृति, मति, धृति के आगार,
सार्द्धशती के शुभ अवसर पर,
भारत के भवितव्य पर,
स्वर्णांकित,तुम्हारा नाम,
सरदार पटेल !
जन्मदिवस पर,
तुम्हें प्रणाम ।
एक्य सूत्र मे हों सब राज्य,
भारत का शसक्त गणराज्य’
इस अटल मन्त्र के तुम विश्वासी,
कृषक पृष्ठभूमि मे पले, बढ़े,
अनुशासित जीवन के अभ्यासी,
एकता, अखण्डता को प्रयासरत
ऐसा था,उनके स्वप्नों का भारत ।
धीरोदात्त प्रखर ज्ञानी,
आजन्म स्वतन्त्रता सेनानी,
राजनीति में विराट व्यक्तित्व,
आजादी का संघर्ष काल,
आप रहे, सर्वप्रिय निर्विवाद,
लोहस्तम्भ से अडिग रहे,
निर्भीक वक्ता, कुशल अधिवक्ता,
निर्धन का पक्ष ले,
निर्धनता के विरुद्ध लड़े ।
उनका मौलिक चिन्तन था,
बिखरे,छितरे भारत को,
पूर्वजों की विरासत को,
एकत्व देना होगा,
आसेतु हिमालय,
एक सूत्र में पिरोना होगा।
यह कार्य कठिन था,दुष्कर था,
क्योंकि,
रागद्वेष का महासागर था,
सबका निजहित सर्वोपरि था।
पर वे तो सरदार थे,
दृढ़ निश्चयी,असरदार थे,
राज्य समूहों को एकत्रित कर,
वह भारत माँ का रत्न,
इतिहास भी जिसकी कृति पर गर्वित है,
विलय-अध्याय में, उनका यश अंकित है।,
साँस्कृतिक एकता, समग्र विकास,
सशक्त राष्ट्र की आधारशिला,
स्वप्न,संकल्प को पूर्णकर,
सेवा का उदाहरण प्रस्तुत कर,
फिर लौटूंगा का वचन भर,
वर्ष पचात में, वह लोहपुरुष,
चिर निद्रा में सो गया,
प्रभा क्षितिज का यह सूर्य ,
अजर,अमर हो गया ।
आज !
गजनी की काली छाया से कलुषित,
द्वादश ज्योतिलिंगों में प्रथम,
सोमनाथ का भव्य मन्दिर,
उसका पुनर्निर्माण,प्राणप्रतिष्ठा,
आपकी शपथ,सौगन्ध का सुफल,
किन्तु संयोग !
उसके लोकार्पण की वेला पर,
आप की अदृश्य छार्व,कीर्ति ही,
दृश्यमान थी,
वहाँ विद्यमान थी ।
उनकी जन्मभूमि पर आहूत,
भव्य आयोजन, ‘भारत पर्व’ !
ध्वजा,कलश पूजन,अभिषेक,
मात्र शासकीय उपकम नहीं,
उनकी पावन स्मृति में,
उनके गुजरात का उत्सव है,
पर्व है,राष्ट्रीय गर्व है ।।