हिमालयी संस्कृति की समृद्ध विरासत को संजोने का सार्थक प्रयास : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून

आशा कोठारी

देहरादून । हिन्दी दिवस के पावन अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी द्वारा कैम्प कार्यालय में हिमालयी संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन को समर्पित पत्रिका “हिमालयन संस्कृति” के प्रवेशांक का विमोचन किया गया।

‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका हिमालयी राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक आस्थाओं, रीति-रिवाजों, लोक कला, लोक साहित्य, इतिहास, विरासत तथा पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े विविध आयामों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। पत्रिका का उद्देश्य हिमालय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और प्रकृति से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने पत्रिका के प्रवेशांक के विमोचन के अवसर पर इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। हिमालयी लोक परंपराओं और विरासत का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

पत्रिका के संपादक श्री रजनीश कौंसवाल ने हिमालयी संस्कृति के विविध पक्षों को एक मंच पर लाने के लिए जिस गंभीरता, संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ इस पहल को आकार दिया है, वह विशेष रूप से सराहनीय है। उन्होंने हिमालय की लोक स्मृतियों, परंपरागत ज्ञान, लोक कलाओं, सामाजिक जनसरोकारों और पर्यावरणीय चेतना को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किया है।
हिमालयन संस्कृति’ का यह प्रवेशांक आने वाली पीढ़ियों के लिए हिमालयी समाज की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का संदर्भ-स्रोत बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पत्रिका संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ हिमालयी पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता को भी नई दिशा प्रदान करेगी।
इस अवसर पर उपस्थित रायपुर विधायक श्री उमेश शर्मा,(काऊ)जी, भाजपा महानगर अध्यक्ष श्री सिद्धार्थ अग्रवाल जी, श्री विनोद खंडूरी जी, बद्री केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष श्री प्रसाद सती जी, सदस्य श्री राजपाल जड़धारी जी, श्री विपिन जी, वरिष्ठ पत्रकार श्री हरीश कोठारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों एवं संस्कृति प्रेमियों ने संपादक रजनीश कौंसवाल को इस अभिनव एवं सराहनीय पहल के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका आने वाले समय में हिमालयी राज्यों की साझा सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त मंच प्रदान करेगी।