आशा कोठारी
जौलीग्रांट/ देहरादून


उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका हिमालयन हॉस्पिटल, जौलीग्रांट आज आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों और मानवीय सेवा भाव के लिए जाना जाता है। वर्ष 1994 में स्थापित यह अस्पताल हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की उस महान सोच का परिणाम है, जिसकी नींव महान योगी एवं मानवतावादी डॉ. स्वामी राम जी महाराज ने रखी थी। स्वामी राम जी ने वर्ष 1989 में हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की स्थापना करते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास को जनसेवा का माध्यम बनाया।
आज हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट एक प्रमुख बहु-विशेषज्ञ शिक्षण अस्पताल के रूप में कार्य कर रहा है। अस्पताल आधुनिक चिकित्सा के साथ योग एवं समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा को भी महत्व देता है और समाज के विभिन्न वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के अपने उद्देश्य पर निरंतर कार्यरत है। अस्पताल में हृदय रोग, कैंसर, किडनी, न्यूरोलॉजी, सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग सहित अनेक विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं।
स्वामी राम जी के सेवा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने में डॉ. विजय धस्माना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संस्थान के विकास, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में अस्पताल में आधुनिक क्रिटिकल केयर सुविधाओं, उन्नत कैंसर उपचार तकनीक और अंग प्रत्यारोपण सेवाओं के विस्तार की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट आज केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि डॉ. स्वामी राम जी के मानव सेवा के महान संकल्प का जीवंत प्रतीक है। डॉ. विजय धस्माना के नेतृत्व और समर्पित चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों से यह संस्थान उत्तराखंड सहित देशभर के मरीजों के लिए उम्मीद, विश्वास और उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा का मजबूत केंद्र बना हुआ है।