देहरादून
आशा कोठारी

देहरादून। उत्तराखंड के जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक श्री संजय टोलिया के नेतृत्व में विभाग प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास, शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रहा है। विभाग का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उपलब्ध कराते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
निदेशक संजय टोलिया ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि जनजातीय समाज के प्रत्येक परिवार तक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचे। इसी दिशा में विभाग छात्रवृत्ति, छात्रावास सुविधाओं, कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार प्रोत्साहन तथा जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रहा है।
उन्होंने बताया कि विभाग विभिन्न जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा कर रहा है, ताकि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके। साथ ही जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, डिजिटल तकनीक और रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
संजय टोलिया ने कहा कि उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत का संरक्षण भी विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक कला, लोक संस्कृति तथा जनजातीय पहचान को बढ़ावा देने वाली विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से जनकल्याण की भावना के साथ कार्य करते हुए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनजाति कल्याण विभाग राज्य सरकार के मार्गदर्शन में जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध रहेगा और विकास की नई संभावनाओं को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।