देहरादून
गिरिजा शंकर जोशी

(18 अगस्त 2018 को फेसबुक पर लिखी अपनी पोस्ट)
1991 के आम चुनाव होने वाले थे… उन दिनों चुनावों में नेताओं के फोटो लगे हुए बैजेज या बिल्लों का चुनाव प्रचार में खूब प्रयोग किया जाता था। बीजेपी भी अटल जी, आडवाणी जी और डा. जोशी जी के बैजेज खूब बांटती थी। मैं बहुत छोटा था और राजनीति, राजनीतिक मुद्दे या कौन नेता कैसा है, नहीं समझता था….
पर मुझे उन रंगबिरंगे बैजेज को इकट्ठा करना बड़ा अच्छा लगता था, क्योंकि पापा बीजेपी के समर्थक थे इसलिए स्वाभाविक रूप से बीजेपी के बैजेज मेरे पास ज्यादा होते थे। उस समय पहली बार मुझे पापा ने अटल जी के बारे में बताया पर मुझे लगा सब लोग आडवाणी जी की बातें करते हैं पर पापा क्यों अटल – अटल करते हैं … पर पापा अटल जी के किस्से सुनाते रहते थे और 1977 में विदेशमंत्री के रूप में दिए गए उनके भाषणों के बारे में बताते थे, मैं बस सुनता रहता था और कहानी जैसी मानकर बस खुश हो लेता था। पर अगले आम चुनाव 1996 तक बीजेपी काफी मजबूत हो गई और आडवाणी जी ने एक दिन देश को बताया कि यदि सत्ता आती है तो अटल जी प्रधानमंत्री होंगे।
तब तक टीवी पर सेटेलाइट चैनल्स आ गए थे और अटल जी के पुराने भाषणों को दिखाया जाने लगा था.. और मुझ में भी राजनीतिक रूप से थोड़ा समझ विकसित हो गई थी… और मेरे मन में अटल जी रमने लगे थे।
फिर क्या था अविश्वास प्रस्ताव के समय दिया गया उनका भाषण दूरदर्शन पर आ गया, सब उनके दीवाने हो गए वो केवल 13 दिन ही प्रधानमंत्री पद पद पर रहे पर सारे हिंदुस्तान के नेता हो गए।
अगली बार 13 माह के लिए आए और परमाणु परीक्षण करके इतिहास में अमर हो गए, और उन्होंने अपनी कुशल कूटनीती द्वारा अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को धीरे धीरे कर गौण ही कर दिया, फिर 1 वोट से सत्ता तो गई पर तब तक अटल जी भारतीयों के हृदय सम्राट बन गए थे । पाकिस्तान को लगा कामचलाउ सरकार है और थोड़े ही समय में चुनाव होने वाले हैं ये सोचकर मुशर्रफ ने कारगिल का युद्ध थोप दिया, अटल तो अटल थे नवाज शरीफ को कुछ ही समय पहले बस में बैठकर मिलने गए अटल जी को मुशर्रफ कम आंक गया। हिंदुस्तान जीत गया और इसके साथ ही अटल जी को सारा देश पूजने लगा था…. चुनाव हुए और पुनः अटल जी प्रधानमंत्री
बने।
सबको साथ लेकर वे ऐसे चले की 22 दलों की सरकार को 5 साल तक चला दिया, चलाया ऐसे की भारत विश्व पटल पर छाने गया, इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को मुख्य हथियार बना उन्होंने भारत की तस्वीर बदलने की कोशिश की…
साथी नेताओं व कार्यकर्ताओं के अति आत्मविश्वास के कारण अगला चुनाव बीजेपी तो हार गई पर अटल तो अटल थे… वो फिर भी देश के सामान्य जनमानस के नेता बने रहे…. राजनीति से संन्यास और फिर बीमारी के कारण लोगों से दूर तो हुए पर दिल में सबके हमेशा एक बात बनी रही…..
अटल जी जैसा कोई नहीं ….. अटल जी जैसा कोई नहीं…..
अटल जी को अश्रुपूरित नेत्रों से श्रद्धांजलि…
सादर,
गिरिजा शंकर जोशी
लेखक IT प्रोफेशनल होने के साथ साथ राजनीतिक विश्लेषक हैं।