देहरादून:
आशा कोठारी

लोहाघाट। लौहपुरुष हर्ष देव ओली के पैतृक गांव खेतीखान में प्रवेश करते ही देश के लिए समर्पण और कर्मनिष्ठा की महक महसूस होने लगती है। इसी खेतीखान में एक परिवार ने अपनी विशिष्ट मिठाई ‘खैचुवे’ के दम पर ऐसी पहचान बनाई है कि इसका स्वाद अब सीमाओं से निकलकर देश-विदेश तक पहुंच चुका है। इस मिठास के पीछे संघर्ष, लगन, ईमानदारी और लोगों के चेहरे पर खुशी लाने का भाव छिपा है। करीब 30 वर्ष पूर्व, गौशनी गांव के युवक पवन ओली ने रोजगार की तलाश में खेतीखान में चाय-पानी की छोटी सी दुकान खोली। चाय के साथ वे अपने हाथों से तैयार की गई खोए और चीनी से बनी “लापसी” ग्राहकों को परोसते थे। पवन की “लापसी” की ऐसी चर्चा फैलने लगी कि उनकी दुकान पर ग्राहकों की कतारें लगने लगीं। सफाई, मिठास, लजीज स्वाद और पवन के हंसमुख स्वभाव ने दुकान को आकर्षण का केंद्र बना दिया।
धीरे-धीरे पवन ने अन्य मिठाइयां भी बनाना शुरू कर दिया। यह पारिवारिक व्यवसाय और आगे बढ़ा। जब उनके डिप्लोमा इंजीनियर बेटे रिंकू ने भी इसमें हाथ बंटाना शुरू किया। रिंकू ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 12 लाख रुपये का ऋण लेकर नया शोरूम बनाया, और यहीं से उनकी बनाई ‘खैचुवे’ ने अल्मोड़ा की बाल मिठाई जैसी पहीचान हासिल कर ली। आज स्थिति यह है कि गुरुद्वारा रीठा साहिब आने वाले देश-विदेश के तीर्थयात्री हों या स्थानीय-पर्यटक—रिंकू का ‘खैचवे’ खाए बिना आगे नहीं बढ़ते। प्रतिदिन यहां 500 लीटर दूध से खोया और पनीर तैयार किया जाता है। पवन और रिंकू की यह सफलता न केवल उनके लिए, बल्कि गांव के कई अन्य परिवारों के लिए भी रोजगार का मार्ग बनी। उनकी दुकान की बढ़ती मांग के चलते गांव के कई लोगों ने डेयरी और गाय पालन भी शुरू कर दिया। रिंकू का परिवार पहले से ‘मौन पालन कार्यक्रम’ से भी जुड़ा है। उनके पास बीस मौन बक्से हैं, जिनका जैविक शहद भी उनकी दुकान में उपलब्ध है।
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रिंकू की ‘खैचुवे’ के “ब्रांड एंबेसडर” बने जिलाधिकारी।
लोहाघाट। रिंकू के कार्य की पहचान तब और बढ़ी जब तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत पांडे ने उनकी दुकान में ‘खैचुवा’ चखकर उनकी पीठ थपथपाते हुए कहा— “आप जितनी मिठाइयां बनाएंगे, उनकी बिक्री की जिम्मेदारी मेरी होगी।” इस प्रोत्साहन ने रिंकू के आत्मविश्वास और व्यवसाय दोनों को नई उड़ान दी।
वहीं वर्तमान जिलाधिकारी मनीष कुमार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं ऐसे युवाओं के पास पहुंचकर उन्हें प्रेरित करते हैं। उनके उत्साहवर्द्धन से रिंकू का कारोबार और तेजी से बढ़ा है। जिलाधिकारी का कहना है कि—
“ऐसे पुरुषार्थी युवक दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और मेहनत से नई राह बनाते हैं।”
फोटो – रिंकू की ‘खैचुवे’ का स्वाद लेती अंग्रेज महिला | तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत पांडे खेतीखान में दुकान में जाकर रिंकू व उसके पिता को प्रोत्साहित करते हुए।