देहरादून:
आशा कोठारी

विनम्र श्रद्धाञ्जलि!
शिखर पुरुष, दिव्य धाम,
आज तव पुण्य-स्मृति पर,
कोटि कण्ठों का प्रणाम।
आपके कृतित्व बल से,
नित्य साधक चल रहे हैं,
आपसे अनुप्राणित अनेकों,
सेवार्थ निशदिन जुट रहे हैं।
देवभूमि को, पुण्य धरा को,
जो उपहार तुमने दिया है,
स्वस्थ रहें, शिक्षित बनें सब,
यही महत् उद्देश्य यहाँ है।
संस्कारो से आच्छादित तन, मन,
सेवारत योवन, क्षण, प्रतिक्षण,
संकल्प आपका हुआ मूर्त,
यही साध थी आजीवन।
देव आप का साक्षात् दर्शन,
चर्म चक्षुओं से अदृश्य है,
किन्तु अक्षुण्ण है, यश-गौरव,
दिग्दिगन्त अजेय है, अक्षय है।
आपका मनोभाव था यह,
अनन्त विपदाओं से घिरे,
देवभूमि हित सब मिल जुल,
हम कुछ करें, कर्तव्य करें।
बस इसी शुभ प्रेरणा से,
गन्तव्य पथ पर बढ़ रहे हैं।
आपसे ज्योतित् अनेकों,
दीप प्रतिपल जल रहे हैं।
झोंक दी निज देह अपनी,
त्रस्त-जन कल्याण करने,
आत्मप्रसिद्धि से विमुख होकर ,
चल दिये सन्ताप हरने।
हर चुनौती में हमेशा,
तुम मुस्कराते ही रहे,
शिखर की ऊँचाइयों पर,
पग बढ़ाते ही रहे।
तुमने सिखाया, हिम्मत जुटा,
जो कोई आगे बढ़ा है,
विजय उसको ही मिली है,
इतिहास उसने ही गढ़ा है।
दीजिये आशीष गुरुवर,
बढ़ते रहे पथ पर निरन्तर,
कर सकें साकार सपना,
आपका संकल्प ऋृषिवर॥